50 से अधिक गांवों के डूबान क्षेत्र में आने की आशंका, कांग्रेस ने आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की लड़ाई राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का दिया भरोसा

बस्तर, 9 अक्टूबर 2026। बस्तर की प्रस्तावित बोधघाट बांध परियोजना को लेकर आदिवासी परिवारों के संभावित विस्थापन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। परियोजना से 50 से अधिक गांवों के डूबान क्षेत्र में आने और हजारों आदिवासी परिवारों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी एवं सांसद सुखदेव भगत ने हितालकुडुम और सातधार पहुंचकर ग्रामीणों तथा प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और प्रस्तावित बांध निर्माण स्थल का निरीक्षण किया।कांग्रेस ने इस दौरान सवाल उठाया कि विकास परियोजनाओं के नाम पर यदि आदिवासी परिवारों को अपनी पुश्तैनी जमीन, घर और पारंपरिक जीवनशैली छोड़नी पड़े, तो उनके अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?

पार्टी ने भाजपा सरकार से प्रभावित होने वाले परिवारों की स्थिति स्पष्ट करने और उनकी चिंताओं का जवाब देने की मांग की।कांग्रेस के अनुसार, बोधघाट परियोजना से प्रभावित होने की आशंका झेल रहे ग्रामीणों की समस्याओं, मांगों और अधिकारों को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तक पहुंचाया जाएगा। पार्टी ने उनकी आवाज राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का भरोसा भी दिलाया।

जल, जंगल और जमीन पर अधिकार का सवालबस्तर में आदिवासी समुदायों की आजीविका, संस्कृति और परंपराएं उनकी पुश्तैनी जमीन तथा प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी हैं। ऐसे में प्रस्तावित परियोजना को लेकर विस्थापन, पुनर्वास और मुआवजे जैसे सवाल अहम हैं।

अब ग्रामीणों की मांग है कि परियोजना से जुड़े संभावित प्रभावों, पुनर्वास की व्यवस्था और अधिकारों की सुरक्षा पर स्पष्ट जानकारी दी जाए।बोधघाट परियोजना को लेकर आगे की स्थिति सरकार के निर्णयों और प्रभावित परिवारों की चिंताओं पर होने वाली कार्रवाई से स्पष्ट होगी।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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