रायपुर | छत्तीसगढ़ की पंचायत राजनीति में अब नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। सरकार ने एक कड़ा फैसला लेते हुए महिला पंचायत पदाधिकारियों के कार्यों में उनके सगे-संबंधियों के हस्तक्षेप पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। अब पंचायतों में पर्दे के पीछे से सत्ता चलाने वालों के दिन खत्म हो गए हैं!
क्यों लिया गया ये फैसला?
छत्तीसगढ़ में पंचायतीराज व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 50% आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इस नीति के चलते हालिया पंचायत चुनावों में 55-60% महिलाएं निर्वाचित हुईं, लेकिन कई जगहों पर यह देखा गया कि असल में फैसले उनके पति, पिता या अन्य परिजन ले रहे थे। इस ‘प्रॉक्सी शासन’ पर अब सरकार ने सख्ती दिखाई है।
अब पंचायत कार्यालय में रिश्तेदारों की NO ENTRY!
सरकार के नए निर्देशों के तहत:
- पंचायत कार्यालय परिसर में महिला पंचायत पदाधिकारियों के कोई भी सगे-संबंधी या रिश्तेदार किसी भी कार्य में हस्तक्षेप नहीं कर सकेंगे।
- पंचायत के किसी भी निर्णय में परिवारजन कोई सुझाव या निर्देश नहीं देंगे।
- यदि कोई महिला पदाधिकारी के स्थान पर उनके परिजन कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं, तो उनके खिलाफ पंचायतीराज अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।
पर्दे के पीछे की सत्ता अब खत्म!
यह कदम छत्तीसगढ़ की पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह फैसला वाकई जमीनी स्तर पर लागू हो पाएगा, या फिर किसी नए तरीके से ‘परदे के पीछे की सरकार’ चलाने की कोशिशें जारी रहेंगी?
क्या यह नियम पंचायतों की असली तस्वीर बदलेगा? या फिर ‘रिमोट कंट्रोल सरकार’ का कोई नया रूप देखने को मिलेगा? बने रहिए हमारे साथ…