Report Rishabh Kumar
“बस्तर में शांति स्थापना की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा बस्तर पंडुम” – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
बस्तर की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं का भव्य उत्सव
रायपुर, 12 मार्च 2025: बस्तर की लोकसंस्कृति और जीवनशैली को संजोने के उद्देश्य से आयोजित होने वाले “बस्तर पंडुम 2025” का लोगो आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में अनावरण किया। इस अवसर पर मांदर की थाप पर नाचते कलाकारों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग दिया।
मुख्यमंत्री ने बस्तर पंडुम को बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की अनूठी पहल बताते हुए कहा कि यह आयोजन बस्तर के असल जीवन को करीब से जानने और समझने का अवसर देगा। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम बस्तर की लोकसंस्कृति, नृत्य, गीत, नाट्य, शिल्प और परंपराओं का भव्य उत्सव है, जो न केवल बस्तर के कलाकारों को मंच देगा बल्कि शांति स्थापना में भी अहम भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बस्तर को नक्सलवाद मुक्त करने और वहां की जनता को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। बस्तर ओलंपिक और अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन में मिली अपार सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों का विश्वास शासन में लगातार बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि नक्सली हिंसा से प्रभावित पुवर्ती गांव में अस्पताल खोलने का निर्णय लिया गया है और “नियद नेल्ला नार योजना” के माध्यम से बस्तर की मूलभूत जरूरतों को तेजी से पूरा किया जा रहा है।
बस्तर पंडुम के लोगो में बस्तर की पहचान
“बस्तर पंडुम” गोंडी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है “बस्तर का उत्सव”। इस लोगो में बस्तर की जीवनरेखा इंद्रावती नदी, चित्रकूट जलप्रपात, छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु वनभैंसा, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना, बायसन हॉर्न मुकुट, तुरही, ढोल, सल्फी और ताड़ी के पेड़ को शामिल किया गया है। यह लोगो बस्तर की संस्कृति और परंपराओं को सुंदर ढंग से दर्शाता है।
लोकसंस्कृति और परंपराओं पर आधारित होगा आयोजन
“बस्तर पंडुम 2025” में जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषण, शिल्प-चित्रकला और जनजातीय व्यंजन एवं पारंपरिक पेय से जुड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
ये स्पर्धाएं तीन चरणों में संपन्न होंगी:
- जनपद स्तरीय प्रतियोगिता: 12 से 20 मार्च
- जिला स्तरीय प्रतियोगिता: 21 से 23 मार्च
- संभाग स्तरीय प्रतियोगिता (दंतेवाड़ा): 1 से 3 अप्रैल
प्रत्येक स्तर पर विजेताओं को विशेष पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
बस्तर की परंपराओं का शानदार प्रदर्शन
इस आयोजन में बस्तर की पारंपरिक नृत्य शैली, रीति-रिवाज, लोकगीत, पारंपरिक वेशभूषा और व्यंजनों का भव्य प्रदर्शन किया जाएगा। प्रतियोगिता में मौलिकता और पारंपरिकता को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, विधायक श्री किरण देव, विधायक सुश्री लता उसेंडी, विधायक श्री विनायक गोयल, संस्कृति विभाग के सचिव श्री अन्बलगन पी. और संचालक संस्कृति श्री विवेक आचार्य उपस्थित रहे।
“बस्तर पंडुम 2025″ न केवल बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को सहेजेगा, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाएगा।”