रिपोर्ट: ओम साहू
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कवर्धा (छत्तीसगढ़):
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले से लोकतंत्र और मानवता को शर्मसार करने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। लोहारा ब्लॉक के सिंघनगढ़ गांव में सांसद प्रतिनिधि व पूर्व सरपंच भगवानी साहू समेत 7 परिवारों के 50 से अधिक सदस्यों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। गांव के सरपंच और कुछ दबंगों ने बाकायदा बैठक कर फरमान जारी किया है कि अगर कोई इन बहिष्कृत परिवारों से बातचीत या लेनदेन करता है तो उसे ₹1000 का जुर्माना भरना पड़ेगा।
बहिष्कार के पीछे का आरोप: फॉर्मासिस्ट का दबदबा
पीड़ित भगवानी साहू ने बताया कि इस बहिष्कार की जड़ में आयुर्वेद अस्पताल में पदस्थ फॉर्मासिस्ट विद्यासिंह धुर्वे है। आरोप है कि यह व्यक्ति गांव में अवैध ताश-जुआ गतिविधियों को संरक्षण देता है और जब कुछ लोगों ने विधायक से उसकी शिकायत की, तो उसने ‘हुक्का-पानी बंद’ का फरमान जारी कर दिया।
पुलिस तक पहुंचा मामला, एसपी कार्यालय में दी गई शिकायत
बहिष्कृत परिवारों ने कवर्धा एसपी कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत सौंपी है। एएसपी पुष्पेन्द्र कुमार बघेल ने पीड़ितों को निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया है और कहा कि “कानून सम्मत जो भी कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।”
पीड़ित परिवारों के नाम:
1. भगवानी साहू (पूर्व सरपंच व सांसद प्रतिनिधि)
2. घांसीराम निषाद
3. संतोष गुप्ता
4. पवन साहू
5. हुलास साहू
6. हेमकुमार साहू
7. शत्रुघ्न साहू
सामाजिक बहिष्कार का वीडियो भी वायरल
पीड़ितों का कहना है कि उनका बहिष्कार सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के जरिए और भी अपमानजनक बना दिया गया है। गांव के लोग उनसे बात नहीं करते, न ही दुकान वाले उन्हें सामान दे रहे हैं। यह सामाजिक उत्पीड़न की पराकाष्ठा है।
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यह खबर मानवाधिकार संगठनों और शासन-प्रशासन के लिए चेतावनी है। यदि अब भी न्याय न मिला, तो यह मामला पूरे छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठा पर धब्बा बन सकता है।
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रिपोर्ट: ओम साहू
प्रबंध संपादक – छत्तीसगढ़ पहट न्यूज
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