रिपोर्ट –जय शंकर पांडे



जगदलपुर, 09 मार्च 2026/ छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। बस्तर जिले के दरभा परियोजना अंतर्गत ग्राम कामानार की रहने वाली श्रीमती लच्छनदई बघेल इस बदलाव की एक जीती-जागती मिसाल हैं, जिन्होंने योजना से मिलने वाली छोटी सी राशि को अपनी सूझबूझ से एक मुनाफे वाले व्यवसाय में बदल दिया है। एकीकृत बाल विकास परियोजना दरभा के चीतापुर सेक्टर के तहत आने वाले इस छोटे से गांव कामानार की लच्छनदई ने यह साबित कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो सरकारी सहायता का सदुपयोग जीवन की दिशा बदल सकती है।

            श्रीमती लच्छनदई बघेल बताती हैं कि राज्य सरकार द्वारा महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही थी। उन्होंने इस राशि को तात्कालिक खर्चों में व्यय करने के बजाय भविष्य की सुरक्षा और आय बढ़ाने के साधन के रूप में देखा। जब योजना की 10 किश्तें जमा होकर 10 हजार रुपये की पूंजी बन गईं, तो लच्छनदई के मन में स्वरोजगार का विचार आया। उन्होंने इस संचित राशि से गांव में ही एक छोटा सा होटल (नाश्ते की दुकान) संचालित करना शुरू किया। यह छोटा सा निवेश उनके जीवन में एक बड़ा आर्थिक मोड़ लेकर आया। होटल शुरू करने के बाद लच्छनदई की आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिला है।

           आज वे अपने इस छोटे से व्यवसाय से प्रतिदिन लगभग 500 रुपये का शुद्ध लाभ कमा रही हैं, जिससे उनकी मासिक आय में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। इस अतिरिक्त आय का उपयोग वे न केवल अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए कर रही हैं, बल्कि इससे उनके परिवार के पोषण स्तर में भी काफी सुधार आया है। लच्छनदई की यह सफलता अब उनके गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। वे अब अपने क्षेत्र की उन महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सबल होने का सलाह दे रही हैं, जो इस योजना का लाभ ले रही हैं। अपनी इस आत्मनिर्भरता और सुखद बदलाव के लिए लच्छनदई बघेल ने राज्य सरकार के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है।

संपादक –ऋषभ कुमार

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By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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